Friday, 23 December 2016

वीणा का गुनाह -- Begining


यह कहानी एक लड़की के बारे में  है, जिसमे कुछ भी असामान्य नहीं था , वह एक सामान्य स्कूली  लड़की थी । उसका नाम  था वीणा  । उसके पिता एक कंपनी में सुपरवाइजर थे और मां घर पर ही रहती थी । उसके स्कूल थोड़ा दूर था जिसकी वजह से वजह  से सामान्यतः वो बस से जाती थी  । उसका  नीले रंग का  बैग और डिजाइनर हेयर पिन, जो उसके पिताजी पटना से खरीदा  था, उसके ट्रेडमार्क था।


                   बस स्टॉप पर वो दिन भी एक सामान्य  दिन जैसा ही था,  वह अपने दोस्तों से बात कर रही  थी साथ मे , जाने या  अनजाने मे  वो एक अंजान  लड़के  की ओर भी देख रही थी | यह लड़का भी एक सामान्य लड़का ही  था इसकी कमर पर  एक स्कूल बैग था  और  कपडे थोड़े गंदे थे। लेकिन उसके चेहरे पर चमक कुछ प्रकार के थी , जो वीणा  को उसे अनदेखा करने की अनुमति नहीं दे रही थी । अगले दिन फिर वही लड़का उसी जगह पर मिला , दोनों ने एक दूसरे की ओर देखा ओर मुस्कुराये , बस फिर  दोनों वापस अपने घर चले गए । एक  महीने हो गया था,  फिर भी दोनों मुस्कान के आगे नहीं  बढ़े थे । एक दिन  आवारा लड़कों के एक  समूह उन दोनों को देखा और वे फिर वो  छेड़खानी पर उतर आए|  उन लड़को ने वीणा को हाथ लगाना शुरू किया , वीणा पीछे हठ गयी | वीणा के लिए जो हो रहा था वो बहुत कुछ अलग भी नहीं था,  क्योंकि उसने  इस व्यवहार को उसके जीवन के हर  पल  मे  देखा था । लेकिन लड़के के लिए शायद ये कुछ नया था  उसने अपने उन लड़को को मना किया , लड़को को ये नागवार गुजरा, जरा सी  देर मे ये छोटी सी बात  हातापाई  मे बदल चुकी थी  |


           अब समूह काफी  हिंसक हो गया और लड़का गंभीर रूप से घायल हो चला था  | उन्होंने वीणा को भी नहीं छोड़ा, जितनी गाली वो दे सकते थी वीणा को दी । वीणा को ना तो ये समझ आया की उसे किस बात की गाली दे जा रही है, न ये ही के वो लोग किसकी मर्जी से वो सब कर रही है । अंत में जब उन्होंने  देखा की  लड़का बेहोश हो गया है  वे उसे छोड़ कई घर की तरफ भाग गयी  | वह पर खड़े  कुछ लोगों ने उन दोनों के  परिवारों को सूचित किया।



            अगले 4-5 दिनों के इन 2 लोगों के लिए बहुत ही बुरे थे|   वीणा के लगभग रोज ही उसके माँ - बाप द्वारा पिटाई की गई थी, क्योंकि उन्हें  लड़ाई के बारे में पता चल गया था  और वे उसे  कोस रहा थे | वीणा को उस सब के लिए प्रातरित किया जा रहा था जो उसने किये भी नहीं था | वीणा के चीखे लगभग रोज मोह्हले मे गूंजती थी|  मोह्हले वाले भी उसे उसके किये का परिणाम बता कर पल्ला छाड़ लेते थे|


     एक सप्ताह  बीत चूका था वीणा को ना तो बहार जाने के इजाजत थी | स्कूल तो अब उसके लिए शायद हमेशा के लिए बंद हो चूका था | हर कोई उसे इस तरह सी   देखता था  जैसे उसने ना जाने कोन सी भरी गुनाह किया हो । जो पडोसी हमेशा उससे बात करते रहते थे वो अब वीणा  के साथ एक मुस्कान साझा करने के लिए भी जिझक रहे थे। वीणा का चेहरा जहा कभी हमेशा एक मुस्कान होते थी अब मुरछाया सा हो गया था , उसके जीने के उमंग  भी  शायद कही खो गयी थी  | उसके चहरे पर जब भी किसी भाव को आने की इजाजत मिलती तो वो भाव भी आपस में लड़ ही रहे होते  थे, कुछ जीने के भाव कुछ विद्रोह के भाव | माँ बाप तो शायद उसको सबक सीखाने की कोशिश  मे इतने खो चुके थे के उनको ये समझ ही  नहीं आ रहा था के जिसको वो प्रताड़ित कर रहे है वो कोई ओर नहीं उनकी ही अपनी बेटी है | वीणा की सबसे पक्की सहेली सयानी ने एक बार चुपके से उससे बात करने के कोशिश की लकिन उसका परिणाम उसे मिलने मे ज्यादा देर नहीं लगी | अगले दिन उसके फटे होठ ओर कान पर लगी चोट इस बात के गवाही दे रहे थे के रात मे उसके साथ क्या हुआ |


दूसरी तरफ लड़के के जीवन भी एक उतना आसान नहीं  था, माता पिता उससे दिन रात पूछ रहे थे की उसने ऐसा  क्यों किया । हर कुछ  बुरा जो अब तक उसके साथ हुआ था उसके लिए अब वीणा को जिम्मेदार बनाया जा रहा था |  उसके माँ बाप ने, वीणा के माँ बाप से भी आ कर बात  की,  ओर उसको नियंत्रण मे रखने के बात कह कर वो लोग वहाँ से चले गए । दूसरी तरफ जिन लड़कों ने उसे पीटा था  | उनसे कोई भी सवाल नहीं कर रहा था के उन्हें क्यों  एक लड़की के साथ ऐसा क्यों किया । कमजोर को पीड़ित करने का रिवाज आज वीणा को पूरी तरह से समझ आ रहा था |



स्कूल में, घर मे  हर कोई  एक ही सवाल  उससे पूछ रहा था की वीणा को उसने कैसे पटाया, वो तो बहुत ही छुपा रुस्तम निकल , ये सब कब से चल रहा था, अकेले में वो लोग कितने बार मिल चुके है | कोई भी ये बात नहीं समझ पर रहा था के वो लोग एक  बच्चे के मन के साथ खेल रहे  है जो के सिर्फ  15 साल का लड़का है, जो इस बोझ लेने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं है । लकिन ना तो उसे स्कूल जाने से रोका गया ना ही लोगो के दिल मे उसके लिए कोई नफरत थे बल्कि उसके लिए कुछ इज्जत थी के उसने ऐसा काम किया जो वो करना तो चाहते थी लकिन नहीं कर पाए | एक ही घटना के दो विपरीत परिणाम दो अलग अलग लोग भुगत रहे थे|




वीना के विचार  हर पल बदल रहे थे  | कभी वो गम के अंधेरो  में  होती तो  कभी  उसका  मन एक घायल शेर के तरह दुनिया को सबक सीखने को करता | कभी उसके मन में उठ रहे प्रश्न का पहाड़ होता तो कभी कुछ छोटे सवाल अपने  माँ बाप के लिये होते तो कभी उस समाज के बेइंतहा नफरत होती जो उसे पता नहीं किस गुनाह के सजा दे रहा था |  कभी वो  और थोड़ा आक्रामक होती तो कभी पीछे हठ कर अपने को अपने आप में समेट लेती। उसका सवाल  माता-पिता के लिए काफी जायज था, के अगर वो मोहन के साथ भाग गयी होते तो क्या वो जायद खुश होते या फिर   उन लड़कों उसके साथ बलात्कार किया होता तो वो जायद निशिन्त होते । सामाजिक धागे में उलझा एक मन हर समय तर्क वितरक पर उतारू था। वो समाज को एक सबक सिखाने को भी आतुर था, लकिन रिस्तो के उन अनचाहे बंधनो ने उसे विवश कर दिया था | माँ जो के कभी वीणा को अपने आँचल में दबा के रखती थी वो अब उसे सबक सिखाने पैर उतारू थी | यह संग्राम अब  महिला बनाम  महिला हो चूका था | एक माँ अब वीणा को  एक दुश्मन की तरह  देख रही है। कई विकल्प उसके  मन  में आ रहे थे मार देने का विचार, शादी का विचार। एक बचपन उनके द्वारा कुचला  ही जा चूका था अब ये लोग वीणा के  जीवन के साथ खेलने के लिए और ज्यादा हिंसक होते जा रहे हैं। वीना को कभी कभी डर ​​लगता था , लेकिन वह जानता है कि यह समाज एक  महिला पर क्या प्रतिक्रिया करता है|



यह सामान्य दिन था | 14 वर्षीय वीना के लिए, उसके चाचा और चाची को कुछ समय के बाद उसके घर आ रहे थे । वे दोनों जमशेदपुर के पास एक कसबे मे रहते थे | वीणा भी अपने चहरे भाई बहनो को देख कर काफी खुश  थी | लगभग 4 महीने के बाद उसे कुछ दोस्तों के साथ मिला था । लेकिन बच्चो के  मन में एक झिझक को  स्पष्ट रूप से देखा जा सकता था । वे लोग  हमेशा वीणा से  कुछ दुरी बनाये रखते थे । जब माता पिता को एक बार बहार गए तो उन लोगो ने बताया के चाचा चाची ने  वीना वीणा से  दूर रहने के लिए कहा है। वीना फिर से अपने पुराग्रहो में फास गयी  इसके  बावजूद के उसने कुछ भी गलत नहीं किया था वो अपने को अपने  माता पिता के लिए एक अभिशाप के रूप मानने लगी थी।  वीणा जा कर भगवान् की मूरत के सामने बैठ गयी लकिन शायद भगवान ने भी उस से मुह फेर लिए था | या फिर भगवान् के पास भी उसके सवालो के कोई जवाब नहीं था तो उन्होंने भी चुप रहना बेहतर समझा |

  माता-पिता  और चाचा चाची ने  वीणा  के बारे में बात करना किया । शायद भारत में हर समस्या के एक ही समाधान होता है  शादी | चाचा-चाची ने भी वीणा के लिए ये ही सुझाव रखा, उन्होंने अपने पड़ोस में रहने वाले एक 30 साल का आदमी दुष्यंत के बारे मे भी बताया |  उन की नजरो मे वो  14 साल की लड़की वीना लिए  बिलकुल सही था । माता-पिता को इस विचार के लिए शायद थोड़ा तैयार नहीं थे। उनके विचार मे ये एक छोटी समस्या से निपटने का एक   जटिल मार्ग था । उनके लाल चेहरे और माथे पर पड़ी रेखाएं  अब एक दूसरे से लड़ रहे हैं। वे अपने  विचारों में वीना कई समय मार चुके थे, लेकिन अब यह  विचार न सिर्फ उसके पूर्णतः  मौत के था, बल्कि गिद्धों के तरह उसके  मृत शरीर को नोचने जैसा भी था । पहली बार डर लगा, लेकिन इसके लिए दुनिया में सबसे अच्छा अभ्यास है अपराध पर चर्चा करो और 2-3 दिनों के बाद  वही जग्नय अपराध अमल करने के लिए आसान हो जाएगा।

  दो दिन के बाद  दुष्यंत उसे देखने के लिए आया, वीणा को एक दुल्हन की तरह तैयार किया गया| वीणा अपने भविष्य से  पूरी तरह से वाकिफ थी । उसे अपने को तैयार करना अंदर ही अंदर खाये जा रहा था, उसे  लग रहा था इससे अच्छा होता के वो उसकी अर्थी सजा देते ।  वीणा ना चाहते हुए भी तैयार हुई और नीचे गयी | उसका मन और शरीर अब साथ नहीं दे रहा था वापस आ कर वो बिस्तर पर गिरी और बेहोश हो गयी |

  जारी  है............

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