अभिमन्यु का जीवन काफी ऊँचे नीचे रास्तो से हो कर गुजर था | माँ स्कूल टीचर थी, तनख्वा मे बस काम चल जाता था | बचपन से हे अभिमन्यु अत्यंत मेधावी छात्र था | उसने हर क्लास मे न सिर्फ अच्छे अंक अर्जित किये बल्कि छात्रवृत्ति लेकर माँ का बोझ कुछ काम किया | उसकी एक मुह बोली बहन प्रेरणा भी थी, अभिमन्यु के पापा के दोस्त की बेटी | प्रेरणा २ साल की ही थी जब एक नशे में धुत ट्रक वाला उसे आनाथ करके चला गया था | रिश्तेदारो ने जब रिस्ते के भाव और प्रेरणा को पालने के खर्च को जब भी टोला उसे पालने का ख़र्च हमेशा जायद नजर आया | लेकिन रिश्तेदार भले ही रिश्ता छोड़ दे, दोस्त दोस्ती कैसे छोड़ता, आखिर अभिमन्यु के पिता उसे घर ले आये | एक दिन ये दोस्त भी अपने दोस्त के पास ही चला गया,इन चारो को इस दुनिया मे अकेला छोड़ के | अभिमन्यु की माँ ने पुरे घर का बीड़ा अपने कंधो पैर लिया, और दोनों को पढ़ाया लिखाया | अभिमन्यु ने आईएम से अपना MBA पूरा किया, प्रेरणा ने भी MCA कर लिया था | प्रेरणा की शादी उसके ही कॉलेज मे पड़ने वाले अलपेश से हुई और धीरे धीरे उनका परिवार बढ़ा, अभिमन्यु को मामा कहने वाली अब दो छोटी बेटिया थी प्रेरणा की| अभिमन्यु ने अब तक शादी नहीं की थी | प्रेरणा नौकरी छोड़, अभी बेटियो को संभाल रही थी | अल्पेश एक बहुराष्ट्रीय कंपनी मे चीफ इंजीनियर था, और उसकी तन्खा काफी थी घर चलाने के लिए, बस समय बीतता जा रहा था |
अभिमन्यु को स्कॉटलैंड की एक बड़ी कंपनी ने अपने कंपनी मे काम के लिए बुलाया | दो साल स्कॉटलैंड मे रहना था, वापिस आकर उसी कंपनी की पूरी फैक्ट्री इंडिया मे खोलने का कॉन्ट्रैक्ट था | अभिमन्यु के लिए ये जैसे उसका मनचाहा काम था, उसने हामी भर दी और वीसा और सभी कागजात पुरे हो गए| ३ फ़रवरी को उसे जाना था | माँ खुश थी, ६ महीने बाद वैसे भी वो मिलने आ ही रहा था | ३ फ़रवरी को जैसे ही उसे जाना था माँ के तबियत थोड़ा ख़राब हो गयी, डॉक्टर को बुलाया, डॉक्टर ने बोला कुछ खास नहीं है थोड़ी कमजोरी है | अभिमन्यु ने टाइम देखा ३ घंटे थॆ फ्लाइट मे, उसे टैक्सी वाले से थोड़ा जल्दी के लिए कहा | टैक्सी वाला एकदम नोजवान था, बोला सर आपको ४० मिनट मे पंहुचा देंगे | थोड़ी देर मे वो लोग एयरपोर्ट की तरफ उड़े जा रहे थी, फ़रवरी के कारण वाहन भी सड़क पर काम ही थॆ | अचानक टैक्सीवाले ने सीधे हाथ पर गाडी को जबरदस्त काट दिया, दूसरी तरफ सी आ रहे मोटर साइकिल वाले के लिए ये बिलकुल अप्रत्याशित था | बडा ही धमाका हुआ मोटर साइकिल वाला दूर जा कर गिर पड़ा | अभिमन्यु कुछ बोलता उससे पहले टैक्सी वाले ने टैक्सी भगा ली | बोला सर आपको लेट लोग अगर रुके तो और पुलिस केस भी हो जाएगा | अभिमन्यु कुछ निर्णय नहीं ली पाया | टैक्सी वाले ने उसे एयपोर्ट के बहार छोड़ा, बोला टूटी गाड़ी लोग देखेगे तो पुलिस वालो को शक हो जाएगा, मे जाकर अम्बुलन्स को वह भेजता हु | अभिमन्यु थोड़ा सा स्वार्थी हो गया, वो जा कर अपने कागजात पुरे करने लगा | थोड़ी देर मे ही वो स्कॉटलैंड के लिए उड़ चूका था |
स्कॉटलैंड मे उसके जीवन ने एक और उड़ान ली| एक दिन अभिमन्यु जब ऑफिस जा रहा था, उसने देखा कोई एक लड़की पर जोर जोर से चिल्ला रहा है, अभिमन्यु ने उन लोगो से अपना मामला घर मे जा कर सुलझाने के लिए कहा, लेकिन उस लड़के को अभिमन्यु की बात थोड़ी नागवार गुजरी, और उसने एक घुसा अभिमन्यु के मुह पर दें दिया, तभी उस लड़की ने उस लड़के को दूर जाने के लिए बोला | वो अभिमन्यु को अपने घर ली गयी, अभिमन्यु को प्राथमिक चिकित्सा देने का बाद उसने अपना नाम इस्ला बताया | इस्ला उसके ऑफिस के अपार्टमेंट के सामने हे रहती थी | दोनों मे थोड़ी बाते होने लगी, इस्ला ने बताया लड़का जिससे उसका झगड़ा हो रहा था उसका बॉयफ्रेंड था | कुछ दिनों बाद अभिमन्यु और इस्ला ने आपस मे प्रेम का इजहार किया और ३ महीने बाद दोनों ने शादी कर ली |
इस्ला स्कूल मे टीचर थी | एक दिन अभिमन्यु एक मीटिंग मे था, उसे एक अनजान नंबर से कॉल आया, अभिमन्यु ने नजरअंदाज किया, लेकिन अगले ही पल फिर से उसी नंबर से कॉल आया | अभिमन्यु ने उठाया तो पता चला इस्ला का एक्सीडेंट हो गया है, जिस बन्दे से एक्सीडेंट हुआ वो उसे लेकर पास के अस्पताल मे ली गया, चोट थोड़ी ज्यादा थी लेकिन समय पर लाने के वजह से उसे कोई जान का खतरा नहीं था | अभिमन्यु तुरंत अस्पताल पहुँचा, वो उस बन्दे से भी मिला, थोड़ा गुस्सा था, लेकिन उसने बताया इस्ला फ़ोन पर बात करते हुए जा रही थी, उसने नहीं देखा की वो रेड लाइट मे रास्ता पार कर रहे है, और ये दुर्घटना हो गयी | अभिमन्यु थोड़ा शांत हुआ, ३-४ दिन बाद इस्ला घर आ गयी, अभिमन्यु ने २ हफ्ते की छुट्टी ले ली थी | कुछ दिन बाद इस्ला काफी सामान्य हो चुकी थी, जिन्दकी फिर पटरी पर दौड़ने लगी |
२ साल बीत गए, अभिमन्यु ने अब वापस जाने का फैसला किया, इस्ला और वो दोनों अपने भविष्य को ले कर काफी खुश थे | अभिमन्यु के दिन कटने का नाम नहीं ले रहे थे, दिमाक मे बस यह चल रहा था, चलो माँ और प्रेरणा से मिलूंगा | प्रेरणा से ज्यादा बात नहीं हो पाती थी, जब भी उसने फ़ोन किया नंबर घंटी बजने के बाद बंद हो जाता | आखिर वो दिन आ गया, इस्ला ने सामान पैक कर लिया, लगभग २० घंटो बाद वो लोग अपने घर के दरवाजे पैर खड़े थे, माँ शायद इन्तजार ही कर रही थे, उसने दरवाजा खोला, माँ बेटे के आँख से आंसू टपक पड़े | १-२ घंटे के बाद अभिमन्यु ने पूछा प्रेरणा कहा है, कभी बात ही नहीं हुई उससे| माँ ने एक गहरी सास ली और अभिमन्यु से लिपट के रोने लगी, "प्रेरणा ने कसम दी थी तुझे बताने को, अलपेश हमे उसी दिन अकेला छोड़ के चले गए थे| प्रेरणा पहले तो बस सदमे मे ही थी, लेकिन कुछ दिन बाद उसने मुझे फ़ोन किया और कभी उससे मिलने न आने की बात कह कर फ़ोन रख दिया | मैंने काफी कोशिश की लेकिन प्रेरणा से कभी नहीं मिल पायी, समाज मे उसके बारे मे उल्टा सीधा सुनती रहती हु, लेकिन मिलना नहीं हो पता, दोनों बच्चे भी पंचगनी हॉस्टल मे रहते है, वो उनसे मिलने भी नहीं जाती |
अभिमन्यु अवाक् था, परेशान था, प्रेरणा जिसके साथ सारा बचपन बीता, वो आज इतना दूर कैसे चली गयी| उसने उसी ढूढने की कोशिश सुरु की लेकिन पता ही नहीं चला, मानो उसने अपने सारे जड़ो को एक एक कर काट दिया था | उसकी फैक्ट्री का काम भी सुरु हो गया गया था, और वो पागलो के हद तक व्यस्त था | इस्ला भी उसके काम मे हाथ बटाती, एक रोज इस्ला की मीटिंग ताज पैलेस मे थी, बहार निकलते हुए उसने एक लड़की को देखा, उसी लगा वो इस लड़की को पहचानती है, पर उसे ध्यान नहीं आ रहा था, वो कार वापस घूमाने वाली ही थी की उसे याद आया वो तो प्रेरणा थी, उसके फोटो घर मे इतने जगह लगी हुई थी, की उसे ऐसा लगता था की वो उसे कई बार मिल चुकी है| उसने तुरंत अभिमन्यु को फ़ोन किया, अगले १०-१५ मिनट मे अभिमन्यु आ चूका था| अभिमन्यु ने रिसेप्शन पर जाकर प्रेरणा के बारे मे पुछा, रिसेप्शन पर लोगो ने असमंजस मे उनकी और देखा | उन्होंने कहा प्रेरणा नाम की कोई गेस्ट नहीं है, अभिमन्यु ने बाहर जा कर थोड़ा इंतजार करने का फैसला किया| आखिर मे २ घंटे बाद उसने प्रेरणा को बहार आते हुए देखा, वो अचानक प्रेरणा के सामने आ गया, प्रेरणा शायद इस टकराव के लिए तैयार नहीं थी | अभिमन्यु ने उसे कार मे बैठने का इशारा किया, चुपचाप वो कार मे बात गयी | थोड़ी देर बाद प्रेरणा और अभिमन्यु घर पर थॆ, अभिमन्यु सवालो के तरकश के साथ तैयार खड़ा था, प्रेरणा निढाल हो कर सोफे पर पडी थी |
अचानक प्रेरणा की रुलाई फुट पडी, जाने कितने दिनों का विष मन मे भर हुआ था, उसके दिल मे जो आज फुट फुट कर बाहर आ रहा था, उसने बताया जिस दिन वो स्कॉटलैंड के लिए गया, उसे दिन अल्पेश घर वापस आ रहे थॆ, रस्ते मे उनकी गाडी ख़राब हो गयी, उनका अस्सिटेंट उसी रस्ते से वापस आ रहा था, उसके उन्हें अपनी बाइक दी और गाड़ी के पास रुक गया, रास्ते मे किसी ने उनकी बाइक तो टक्कर मारी और उन्हें मरता हुआ छोड़ कर चला गया, ४-५ घंटे वो रस्ते मे तड़पते रहे, लगभग सुबह के ५ बजे किसी ने उन्हें पड़े हुए देखा, लेकिन तब तक जिन्दकी हार चुकी थी | उनके मरने के बाद पता चला के उनके ऑफिस मे कोई टर्म पालिसी नहीं है | उनका बिमा सिर्फ १० लाख का था, वो रकम तो लगभग ४-५ महीनो मे ही ख़तम हो गयी, नोकरी के लिए न जाने कितने चक्कर लगाए, हर कोई जिस्म फरोशी के लिए तो तैयार मिलता लेकिन काम के लिए नहीं| थक कर उसने अल्पेश की फैक्ट्री के मालिक से दूसरी शादी कर ली, बाद मे पता चला के उसके लिए, प्रेरणा मन बहलाने से ज्यादा कुछ नहीं है, लेकिन अब वो प्रेरणा के घर का खर्च चला रहा था, प्रेरणा ने भी समय से समझौता कर लिया |
अभिमन्यु सुन कर हतप्रभ था, उसे समझ आ गया था, प्रेरणा के जीवन मे आये इस उथल पुथल के पीछे वो ही है | लेकिन अब देर हो चुकी थी, अभिमन्यु आज उस दिन को कोस रहा था, जब उसने अल्पेश को मरता हुआ छोड़ा था | उसने प्रेरणा के बच्चो के पूरी जिम्मदारी लेने का फैसला किया | लेकिन आज उसे समझ आया हर गुनाह पीछा करते हुए कभी न कभी सामने आता है |